दोस्तों आज श्री देव सुमन कि पुण्य तिथि है उस महान पुण्य आत्मा को श्रधान्जली देते हुए हमें यह सोचना चाहिए कि भले ही आज हम राज शाही के गुलाम न हों फिर भी कुछ संकीर्ण मानसिकताओं के गुलाम हम आज भी हैं जात . धर्म . भाषा के नाम पर एक दुसरे से घिरना करना कंहा कि मानवता है . एक और हम और हमरा देश नक्सलवाद , भ्रस्टाचार, आतंकवाद , महंगाई और भुकमरी का शिकार है और हम चंद राजनीतिकों के इशारे पर एक दुसरे के खून के प्यासे हों जाते हैं ………………….. शायद हमें एक और क्रांति कि जरूरत है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, Jai hind





